|
Article Details :: |
|
|
| Article Name : | | | प्रसाद के नाटकों के स्वरूप का सामाजिक अध्ययन | | Author Name : | | | चन्द्र कान्त शुक्ल | | Publisher : | | | Ashok Yakkaldevi | | Article Series No. : | | | ROR-16684 | | Article : | |  | Author Profile | | Abstract : | | | यह सर्वकालिक सत्य है कि साहित्य समाज का दर्पण होता है। प्रसाद जी साहित्य सर्जना में जिस काल विशेष में प्रवृत हुए वह काल भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का चरमोत्कर्ष काल था। देश की बहुसंख्यक जनता किसी न किसी रूप में भारत को स्वतंत्र कराना चाहती थी, चतुर्दिक देशभक्ति के उदाहरण सामने आ रहे थे, ऐसे वातावरण में भला कोई साहित्यकार इस महासंग्राम में अपने योगदान से कैसे पीछे रह सकता हैै। | | Keywords : | | |
|
|
|